गुरुवार, 24 मार्च 2011

ताज की तासीर



कहते हैं की उनके हाथों  में जादूगरी है. जिस पत्थर को छो लेते हैं, वह बोलने लगता है. उस पत्थर में जान पड़ जाती है. बेजान होते हुए भी अपने होने का अहसास करते हैं. मगर, यही पत्थर उनकी जान को जोखीम में डाल रहे हैं. दुनिया कि सबसे खुबसूरत इमारत "ताजमहल" के मोडल बनाते-बनाते वे गंभीर बिमारी का शिकार हो रहे हैं. ऐसी बिमारी जो उनसे उनकी जिन्दगी छीन सकती है. जी हा, जो हुनर शिल्पकारो को दो वक़्त कि रोटी मुहिया करा रहा है, वाही हुनर उनका सबसे बड़ा दुश्मन साबित हो रहा है. सेलम के जिस ताज के मोडल को खूबसूरत बनाने में वे अपनी जान झोक देते हैं, उसी मोडल से निकालने वाले धुल के कण उनकी खुशिया लूट रहे है. आगरा के मेडिकल कॉलेज में हाल ही में सेलम कारीगरों को लेकर एक सर्वे कराया गया है, जिसमे खुलाशा हुआ है कि सामान्य व्यक्ति कि अपेछा सेलम वर्कर को टीवी कि बीमारी ज्यादा होती है. कहा जाता है कि ताजमहल बनाने वाले बीस हजार कारीगरों के बादशाह ने हाथ कटवा दिए थे. उन कारीगरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था (ऐसा कहा जाता है, कही कोई तथ्य नहीं है) . क्या ताज का मोडल बनाने वाले कारीगरों को भी कुछ ऐसी ही सजा मिल रही है?